ईमान क्या है islam ke anusar imaan kise kehte hai

ईमान क्या है इस्लाम के अनुसार

इस पर गौर करने वाली बाते में आप share कर रहा हु इस्लाम में ईमान क्या है!

इस बारे में कुछ हदीस आपके सामने रखना चाहुगा जो बताएगी की ईमान क्या है! नबी ने फ़रमाया है ईमान की 70 से भी ज्यादा शाखये है पर सबसे जरुरी और importent शाख “ ला इला-ह  इल्लल्लाह, का कहना है!

इस्लाम सारा दिन इसमें है इसके बगैर न ईमान सही होता है ना ही कोई मुसलमान होता है! जब कोई बन्दा सच्चे दिल से ला इलाह इल्लल्लाह कहता है,

जिस का अर्थ है अल्लाह या god एक है! इस्लाम के अनुसार ईमान 

तो इस कालिमा के पढने से यकीनी तौर पर आसमानों के दरवाजे खोल दिए जाते है यहाँ तक ये कलमा सीधा अर्श तक पहुचता है, यानी फ़ौरन काबुल होता है, बस एक शर्त ये है की कलमा पड़ने वाला कबीरा गुनाह (बड़े गुनाह ) से बचता हो!

इस कालिमा पर जन्नत का वादा फरमाया है और खुदा वादा खिलाफ नहीं करते!

नबी ने फ़रमाया है इस्लाम के अनुसार ईमान क्या है

जिस प्रकार कपडे के घागे गिस जाते और वो कमजोर पड़ने लग जाता है उस ही प्रकार इस्लाम भी एक जमाने में

कमजोर पड़ जाएगा, यहाँ तक किसी को ये भी याद नहीं रहेगा रोज़ा किया है सदका और हज क्या चीज़ है? एक दिन आएगा कुरआन दुनिया से उठा ली जायेगी और जमीन पर उसकी एक आयत भी बाकी न रहेगी!

पर कुछ बुजुर्ग (बूढ़े लोग ) होगे जो ये कहेगे हमने आपने बाप-दादा को ये कालिमा ला इलाह इल्लल्लाह पड़ते सुना है इसलिए हम पड़ लेते है! ये कालिमा ही दोजख़ से नजात दिलाने वाला होगा!

ये कालिमा फायदा जरुर पहुचयेगा अगर उसने कुछ-कुछ गुनाह किये होगे जिस की सजा मिलनी लाजमी है तो सजा मिलने के बाद जन्नत मिलेगी!

ईमान क्या है islam ke anusar imaan kise kehte hai
                 ईमान क्या है islam ke anusar imaan kise kehte hai

हज़रत नुह ने अपने बेटो को वसीयत करी है

नूह ने अपने बेटो से फ़रमाया है मेरे बेटे ! मेरे बेटे ! तुम को दो काम करने की वसियात करता हु और दो कामो से रोकता हु! एक तुम्हे में ला इला-ह इल्लल्लाह पढने का हुक्म देता हु,

क्युकि अगर ये कालिमा एक पलड़े में रख दिया जाए और तमाम आसमान और जमीन की चीज़े दुसरे पलड़े में रख दी जाए तो ला इलाह इल्लल्लाह वाला पलड़ा झुक जायेगा!

दूसरी चीज़ फरमाई “सुब्हानल्लाहिल अजिमी व बिहम्दिही का पढना है

इस की बरकत से दुनिया के लोगो को रोज़ी दी जाती है और दो काम से रोकता हु शिर्क आयर तकब्बुर से, क्युकि दोनों बुराइया बन्दे को अल्लाह से दूर करती है!

किसी शख्स ने ने नबी से पुछ की ये ईमान क्या होता है इस पर रसूलुल्लाह ने इरशाद फ़रमाया :

जब तुम को अपने अच्छे अमल (काम ) से ख़ुशी हो और अपने बुरे काम पर रंज (दुखी या अफसोस ), तो तुम मोमिन हो!

जन्नती जन्नत में होगे और दोजखी दौजख में दाखिल हो चुके होगे, फिर अल्लाह ताला (god) इरशाद फरमायेगे: जिसके दिल में राइ के दाने के बराबर भी ईमान हो, उसे भी दोजख़ से निकल लो, उसे भी दोजख़ से निकल लिया जाएगा वो जहानम की आग में जल कर कोयल हो चूका होगा उसे अल्लाह फिर से पहले जैसा बना देगे!

ईमान ये अल्लाह एक है इसलिए उसकी ही इबादत करो!

एक बार नबी मोहमद मुस्तफ़ के पास एक इंसान आया और कहता है मेरे दिल कभी ऐसे ख्याल (thought) आते है जिनको जुबान पर लना में बुरा समझता हु! नबी ने इरशाद फ़रमाया यही तो ईमान है!

जो शख्श अल्लाह (god) से इस हल में मिले की उसने खुदा के सिफ़ा किसी और खुदा न बनाया हो ना किसी बेकुसूर का कत्ल किया हो वो अल्लाह के दरबार में (इन दो गुनाह के बोझ ना होने की वजह बहुत हल्का महसूस करेगा!  तो वह जन्नत के जिस दरवाज़े जिस चाहेगा जन्नत में दाखिल हो जायेगा!

दोस्तों इस्लाम के अनुसार ईमान क्या है मैंने आपको बाते इसलिए share की है क्युकि इस्लाम ऐसा धर्म है  जिसमे किसी बेकसूर को इंसान को क़त्ल करने का कही समर्थन नहीं करता है

जो इन्सान इस्लाम धर्म नाम पर बेकसूर लोगो को मरते है वो मुसलमान तो क्या इंसान कहलाने के लायक नहीं है उनकी की वजह इस्लाम बदनाम होता है!

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