Muharram Islam me kyu important hai

Muharram Islam me kyu important hai मुहर्रम कोई मुसलमानों  का festival या त्यौहार नहीं है जहा आपने अच्छे-अच्छे कपडे पहने और खुशिया मानए muharaam का मतलब ये नहीं है आप गाये और ताजिया देख आये!

ये muharaam नहीं है muharram  क्या hai इसको समझने के लिए ये पोस्ट पूरी पड़े! जब आपको समझ आये muharaam किया है ?

महर्रम क्या है ?( Muharram Islam me kyu important hai )

मुहर्रम इस्लामी calendar के हिसाब से नये साल (new year) का पहले महिना (month) होता है ! Allah के रसूल मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इसे Allah को याद करने का बहुत खास महिना (month)कहा है!

Muharram Islam me kyu important hai

एक हदीस में आया है Ramadan के महीने के इलावा इस महीने में रोज़े रखने का बहुत बड़ा सवाब होता है! इस महीने में Allah की बहुत इबादत करनी चाहिए!

Allah के रसूल मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इस महीने में खूब रोज़े रखे! मुहर्रम की 9 date को इबादत का बहुत बड़ा सवाब है!

इब्ने अब्बास ने भी कहा है जो Allah रसूल मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के साथ रहते थे!

Allah रसूल ने कहा जिसने मुहर्रम की 9 तारीख को रोज़ रखा उसके Allah 2 साल गुनाह माफ़ कर देगे! पर ये रोज़ आनिवार्य नहीं है!

इसी ही दिन Allah के नबी hazrat नुह की कशती को किनारा मिला था !

10 मुहर्रम को एक ऐसी घटना हुई जिसका world इतिहास में Islam में महत्वपूर्ण स्थान है!  जो इराक country में कर्बला में हुई थी!

इस घटना में Hazrat  इमाम हुसैन और उनके के family के लोगो को शहीद कर दिया गया था!

जो बहुत दुःख और शर्मनाक(shameless) घटना थी!

कर्बला की जंग या लड़ाई क्यों हुई ?( Muharram Islam me kyu important hai )

Allah के रसूल मुहम्मद मुस्तफा के दुनिया (world) से रुकसत होने के बाद इमाम अली को खलीफा(king) बनाया गया!

जो अधर्मी या बुरे लोग (bad people) को बर्दाशत नहीं हो रहा था!

उन्होंने बुरे लोग (bad people) के साथ कई लड़ाई लड़ी और एक लडाई में वो शहीद हो गए!

उसके बाद हसन इब्न अली को खलिफा (king) बने उनको भी बुरे लोग(bad people) ने शहीद कर दिया!

उस समय वहां का शासक (king) yazeed मना जाता है जो बहुत बुरा(very bad person) और अत्याचारी था अपनी हुकूमत (people ) पर जुल्म सितम करता था!

ईराक और कुफा के लोग हज़रत इमाम हुसैन को वह का खलीफा (king) बनाना चाहते थे!

इसलिए इराक और कुफा के लोग ने Hazrat ईमाम हुसैन को कई ख़त (letter) भी लिखे और वहा आने के लिए कहा या बुलाया!

पर वहां का शासक (king) यजीद ये चाहता था की hazrat imam Hussein उनके साथ मिल जाये और उनका साथ दे!

उसको पता था अगर hazrat imam Hussein इनके साथ मिल गए तो पूरा Islam उस की मुट्ठी में होगा और वो जैसे चाहे उसका वो रूप (shape) दे सकता है

वो जैसे चाहे नियाम या कानून (law) बना सकता है Islam  को लेकर!  पर बहुत कोशिश के बाद भी इमाम हुसैन ने yazeed की बात नहीं मानी!

कर्बला की जंग (Muharram Islam me kyu important hai )

4 मई 608 ई. में hazrat imam Hussein मदीन से मक्का हज करने का इरादा लिया और आपने परिवार (family) और कुछ दोस्तों (friends) को लेकर मक्का की तरफ निकले!

रास्ते में उन्हें दुशमन (enemy) के बुरे इरादों का पता चला!

वो दोखे(cheating) से उन्हें मारने का इरादे से हाजी का भेष बना आर मक्का में आकर उनका कत्ल (murder) करना चाहते है!

hazrat imam Hussein नहीं चाहते थे थे की मक्का की पाक जामीन (spiritual land )पर कोई भी खून ख़राब हो!

hazrat imam Hussein ईराक शहर और कुफे की और चल दिए जहा लोग (people) उनको ख़त (letter) लिखा करते थे और बुलाते थे की वो आये वो उनको खलीफा (king) बनाने का इरादा रखते है!

जिस जगह (place) पर आपने आपने खेमे लगाये उस जगह को पहले खरीद (purchase)  बाद में वहां आपने खेमे लगये!

जह्नाम क्या है ?

यजीद ने आपने लोगो(people) से कह दिया की वो

hazrat imam Hussein पर दबाव(pressure) डाले की वो यजीद का साथ दे! जब hazrat imam Hussein यजीद साथ देने के लिए नहीं माने!

तो याजीद ने आपनी फौज को नहर पर लगवा दी और hazrat imam Hussein और उनके लोग को पानी पिने से रोक दिया!

नहर पर यज़ीद की फौज को देख कर ईराक और कुफो के लोग डर (fear) गए और उन्होंने hazrat imam Hussein का साथ नहीं दिया

जिसको वो ख़त(letter) लिख कर  बुलाते थे जिनको वो कहते थे हम आपको खलीफा (king) बनाना  चाहते है!

पुरे तीन दिन hazrat imam Hussein और उनके दोस्तों और परिवार के लोग प्यासे रहे तब जा कर hazrat imam Hussein ने यजीद की फौज से पानी मांग जो की उन्होंने देने से मना कर दिया!

यजीद सोचता था hazrat imam Hussein भूख-प्यास से टूट जायेगे और उनकी शर्तो को मान लेगे! पर hazrat imam Hussein  प्यास भी तोड़ नहीं सकी!

तब यजीद की फौजो ने hazrat imam Hussein के खेमो पर हमले करना शुरू कर दिए!

जिसके बाद hazrat imam Hussein उनसे एक रात (night) टाइम माँगा गौर करने की बात है

उस रात hazrat imam Hussein और उनके पारिवार ने Allah की इबादत की और रो रो कर दुआए मांगी!

में मेरा पारिवार (family) चाहे शहीद हो जाए,  Allah का दींन islam जो उनके नाना मुहम्मद सल्लाहू अलेही वसल्लम लाये थे वो बचा रहे !

कर्बला की लड़ाई का दर्द और बहादुरी

10 अक्तूबर 680  ई. को फज्र की नमाज़ के बाद दुशमन (enemy) की फौज जो की 40,000 के आस-पास थी दूसरी तरफ hazrat imam Hussein और उनका पारिवार जो 72 लोगो के आस-पास था

जिसमे 6 महीने से 13 साल के बच्चे (children) तक शामिल थे! Islam  की बुनियाद को बचने के लिए 72 लोगो ने आपनी जान (life) की कुर्बानी दे दी!

hazrat imam Hussein और उनके पारिवार के लोगो बड़ी बहदुरी (heroism) से लडाई करी जहा वो शहीद हो गए!

दुशमनो (enemy) ने 6 महीने बच्चे (child) तक को नहीं छोड़ा उसके गले पर भी तीर चला दिया!

7 महीने के बच्चे(child) औंन-मोहम्मद के सर तलवार चला कर उसको भी शहीद कर दिया!

13 साल के बच्चे हज़रत कासिम को घोड़ो के पैरो से कुचलवा कर उनकी जान(life) ले ली!

ताजिया का जुलुस

12 शताब्दी में India के पहले बाहर के शासक क़ुतुब –उद-दिन-ऐबक  के समय से Delhi में ताजिये निकाले जाते रहे है!

इस दिन (day) शिया मुसलमान इमामबड़ो में जाकर मातम मानते है खास लार India में लखनऊ में इसको बहुत जोर-शोर से इसे मानते है !

ताजिया : रंग-बिरंगे कागजों और plastic से मकबरा बनाया जाता है शिया मुस्लमान hazrat imam Hussein की कब्र के प्रतिक के रूप में इसे बनाते है

इसके आगे मातम करते है और या हुसैन या हुसैन मर्सिया पढते है!

ग्यारहवे दिन जुलुस के साथ ले जाकर इसे दफ़न कर दिया जाता है !

जन्नत क्या है ?

 Hazrat imam Hussein और उनके पारिवार की कुर्बानी को हर मुसलमान को याद रखना चाहिए

hazrat imam Hussein ने Islam यानी की सच्चाई और इन्साफ के लिए आपनी जान दे दी पर बुराई (evil) के आगे झुके नहीं!

उनके नाना जो Allah  का दींन लाये थे उस में खराबी या उसको आपने ख़राब नहीं होने दिया !

Allah  के रसूल (messenger) मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम जिस दीन पर इतनी मेहनत करी आपने ही लोगो के जुल्म और सितम सहे पर पलट जवाब देने तो दूर उन्होंने कभी उनके लिए बद्दुआ तक नहीं करी!

दोस्तों और हम लोग किया करते जरा सी बातो पर लड़ते है ये Islam  हमें नहीं सीखाता  है ! इस्लाम अच्छाई और इन्साफ का दूसरा नाम है!

जो सभी लोगो के साथ अच्छा बर्ताव करना सीखता है चाहे वो Islam को मानते हो या नहीं!

कुछ लोगो ने Islam  को बदनाम कर दिया है बेकसूर लोग मरते है लोगो पर जुल्म सितम करते है और कहते हम मुस्लमान है

वो मुसलमान तो दूर इंसान (human) कह जाने तक के लायक नहीं है !

Allah के रसूल मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम जो दीन लाये अगर मुसालमान उसही तरीके से उस पर आमल करता!

तो आज पूरा world ने ला इल्लाह इलाह मुहम्म्दु रुसुलुल्लाह पड लिया होता!

जो ये कहता है की Allah एक है और मुह्हमद उसके के रसूल यानी एक messenger है !

Muharram Islam me kyu important hai  मेरी पोस्ट आपको अच्छी लगी हो तो ज्यादा से ज्यादा लोग को share करे!

जिससे उनको  muharaam किया सही से लोगो पता चल जाये!

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muharram क्या है ?

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